261 ईसा पूर्व में लड़ा गया कलिंग युद्ध भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। यह संघर्ष मौर्य सम्राट अशोक और कलिंग राज्य के बीच हुआ था, जो आज के ओडिशा और आंध्र प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में स्थित था। इस युद्ध में लाखों सैनिकों और नागरिकों की जानें गईं, जिससे अशोक को गहरा पछतावा हुआ। इस घटना के बाद, अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया और अहिंसा और शांति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कलिंग युद्ध ने न केवल मौर्य साम्राज्य के विस्तार को प्रभावित किया, बल्कि अशोक के जीवन और शासन में भी एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया। यह युद्ध भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है।
| वर्ष (ई.पू.) | घटना का विवरण |
|---|---|
| 269 ई.पू. | Samrat Ashoka ने मौर्य साम्राज्य के विस्तार के लिए कलिंग पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। |
| 265 ई.पू. | कलिंग राज्य ने मौर्य साम्राज्य के विरुद्ध युद्ध की तैयारी शुरू की। |
| 261 ई.पू. | कलिंग युद्ध का प्रारंभ हुआ, जो आधुनिक उड़ीसा के धौली और गंगा नदी के आसपास लड़ा गया। |
| 261 ई.पू. | युद्ध के परिणामस्वरूप लगभग 1 लाख लोग मारे गए, और 1.5 लाख लोग घायल हुए। |
| 261 ई.पू. | युद्ध की समाप्ति के बाद, अशोक ने युद्ध के विनाशकारी परिणामों को देखकर बौद्ध धर्म अपनाया। |
| 260 ई.पू. | अशोक ने धम्म प्रचार शुरू किया और हिंसा का त्याग करने का निर्णय लिया। |
| 259-255 ई.पू. | अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए धम्म महामात्रों की नियुक्ति की और बौद्ध धर्म को साम्राज्य में फैलाया। |
कलिंग युद्ध का परिचय | Kalinga War
कलिंग युद्ध का परिचय देने से पहले यह जानना महत्वपूर्ण है कि कलिंग युद्ध कब हुआ, इतिहास में इस युद्ध के पुख्ता प्रमाण नही है पर कुछ साक्ष्य कहते हैं कि कलिंग युद्ध 261 ईसा पूर्व हुआ। कलिंग युद्ध ने सम्राट Ashoka The Great के हृदय में महान परिवर्तन कर दिया, और इसके बाद मिली भारतीय इतिहास को एक नयी दिशा, जिसने आने वाले वर्षों में भारत के हृदय में आध्यात्मिक और धम्म विजय का युग शुरू कर दिया।
कलिंग युद्ध का अध्ययन करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह युद्ध न केवल राजनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि इसने भारतीय समाज के धार्मिक और सामाजिक संदर्भों को भी प्रभावित किया।
युद्ध का संक्षिप्त विवरण
- कलिंग का युद्ध के प्रारम्भ होने से पहले King Ashoka ने कलिंग के राजा पद्मनाभन को एक पत्र लिखा और अपने मौर्य साम्राज्य में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। पर कलिंग के राजा अनंत पद्मनाभन यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।
- हिंद महासागर पर कलिंग राज्य का एकाधिकार था और यही वजह थी की ये विदेशी व्यापार को प्रभावित करते थे। इसलिए सम्राट अशोक को इसे जीतना जरुरी हो गया।
- और फिर सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण कर दिया।
- कलिंग का युद्ध धौली की पहाड़ियों पर लड़ा गया था।
- इस युद्ध के परिणामस्वरूप कलिंग की पूरी सेना का सफाया हो गया।
- इस युद्ध में लगभग 1.50 लाख कलिंग के सैनिक और 1 लाख मौर्य सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए।
- इस युद्ध के बाद दया नामक नदी खून से बहने लगी।
- यह सब नजारा देख कर सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तित हो गया।
कलिंग युद्ध की मुख्य बातें
- कारण:
- मौर्य साम्राज्य के विस्तार की इच्छा
- कलिंग का रणनीतिक और व्यापारिक महत्व (समुद्र तटीय राज्य होने के कारण)
- विपरीत पक्ष:
- मौर्य साम्राज्य का नेतृत्व सम्राट अशोक महान कर रहे थे
- कलिंग एक स्वतंत्र राज्य था, जो आज के ओडिशा क्षेत्र में स्थित था
- कलिंग के शासक का नाम इतिहास में स्पष्ट नहीं है
- परिणाम:
- युद्ध में अत्यंत भारी जनहानि हुई
- अनुमानतः 1 लाख से अधिक लोग मारे गए
- 1.5 लाख से अधिक लोग बंदी बनाए गए
- युद्ध ने समाज और मानवता को गहरा आघात पहुंचाया
- अशोक का परिवर्तन:
- युद्ध की हिंसा और मृत्यु से अशोक आंतरिक रूप से विचलित हो गए
- उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार किया
- जीवनभर अहिंसा, करुणा, शांति और धर्म प्रचार में लगे रहे
- महत्व:
- कलिंग युद्ध ने भारतीय इतिहास में नैतिकता और धर्म को राजनीतिक शक्ति से जोड़ दिया
- अशोक का शासन युद्ध-विजय से धर्म-विजय की ओर मुड़ा
- उन्होंने धम्म नीति अपनाई और पूरे भारत और विदेशों में बौद्ध धर्म का प्रचार किया
कलिंग युद्ध किसके बीच हुआ? | Kaling Yuddh kab Hua Tha?
- कलिंग युद्ध 261 ईसा पूर्व में हुआ था।
- युद्ध सम्राट अशोक (मौर्य साम्राज्य) और कलिंग राज्य (वर्तमान ओडिशा) के बीच लड़ा गया।
- सम्राट अशोक मौर्य साम्राज्य के शासक थे, जिन्होंने विशाल और शक्तिशाली सेना का नेतृत्व किया।
- अशोक की सेना में युद्ध हाथी, पैदल सैनिक, और घुड़सवार शामिल थे।
- कलिंग की सेना ने स्थानीय और गुरिल्ला युद्ध रणनीतियों का इस्तेमाल किया।
- राजा खरवेला कलिंग के प्रमुख शासक थे, लेकिन उनकी भूमिका युद्ध में विवादास्पद रही।
- मौर्य साम्राज्य की सेना की संख्या और शक्ति कलिंग से अधिक थी, लेकिन कलिंग ने हिम्मत और विरोध किया।
- युद्ध के परिणामस्वरूप, कलिंग पर मौर्य साम्राज्य का कब्जा हो गया।
कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया और अपना जीवन धम्म (धर्म) के प्रचार को समर्पित कर दिया।
कलिंग युद्ध का महत्व:
यह युद्ध भारतीय इतिहास की एक निर्णायक घटना थी, जिसने सम्राट अशोक के जीवन में गहरा परिवर्तन लाया।
इस युद्ध ने अशोक को एक निर्दयी विजेता से एक धार्मिक और शांतिप्रिय शासक में बदलने की दिशा दी।
यह संघर्ष अहिंसा के संदेश और युद्ध की निंदा को स्थापित करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
कलिंग युद्ध कब हुआ? | Kaling Yuddh kab Hua?
- कलिंग युद्ध 261 ईसा पूर्व में लड़ा गया था।
- यह युद्ध मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल के आठवें वर्ष में हुआ था।
- सम्राट अशोक अपने राज्य का विस्तार करना चाहते थे और अपने दादा की हार का बदला भी लेना चाहते थे।
- ऐसे समय कलिंग के कुछ विरोधियों ने सम्राट अशोक का साथ दिया, जिसके कारण सम्राट अशोक की सेना कलिंग की सेना के मुकाबले अधिक हो गई।
कलिंग युद्ध क्यों हुआ?
वैसे तो युद्ध के अनेकों कारण हो सकते हैं जैसे आर्थिक कारण या राजनैतिक कारण, पर कलिंग युद्ध क्यों हुआ, इसके कारण की खोज करने पर इसके दो पहलू सामने आते हैं, एक तो मगध के राजा सम्राट अशोक का बदला और दूसरा विस्तार वाद, आइए पहले कलिंग युद्ध क्यों हुआ, इसके कारणों को देखने के बाद, इसके मौर्य साम्राज्य के साथ राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों को समझते हैं –
युद्ध के कारण
कलिंग एक स्वतंत्र राज्य था, जो मौर्य साम्राज्य की सीमाओं के निकट स्थित था। अशोक ने इसे अपने साम्राज्य में सम्मिलित करने की कोशिश की, लेकिन कलिंग ने इसका कड़ा विरोध किया। कलिंग युद्ध क्यों हुआ, आइये इस युद्ध के सभी कारणों पर एक नजर डालते है –
- मौर्य साम्राज्य के प्रथम सम्राट और Samrat Ashoka के दादा चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने राज्य का विस्तार करने के लिए कलिंग पर हमला किया था, लेकिन उन्हें इस युद्ध में हार गए थे, इसी बात का बदला लेने के लिए सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया।
- भारत में राजनीतिक एकीकरण के लिए कलिंग एक महत्वपूर्ण राज्य था। यह उत्तर और दक्षिण के बीच मुख्य रोड़ा था। दक्षिण क्षेत्र में राज्य विस्तार हेतु यह रास्ते में पड़ता था इसलिए इसको जीतना जरुरी था।
- हिंद महासागर पर कलिंग राज्य का एकाधिकार था और यही वजह थी कि वे उत्तर के राज्यों को व्यापार नहीं करने देते थे, अतः मौर्यों को व्यापार के लिए कलिंग पर अधिकार करना जरुरी हो गया था, यह भी कलिंग के युद्ध का एक मुख्य कारण था।
- कलिंग का मौर्य साम्राज्य में मिलना सम्राट अशोक के राज्य के विस्तार के लिए आवश्यक हो गया था, यह भी एक प्रमुख वजह थी, जिसके कारण कलिंग का युद्ध हुआ।
राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
अगर कलिंग का युद्ध के राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों की बात की जाए तो कलिंग राज्य एक शक्तिशाली राज्य था पर मगध के पड़ोस में कलिंग जैसे शक्तिशाली राज्य का होना मौर्य साम्राज्य के लिए राजनीतिक दृष्टि से ठीक नहीं था। सम्राट अशोक विस्तार वादी नीति का अनुसरण करते थे और ऐसे में कलिंग मगध के लिये ख़तरा बन सकता था जैसा कि बाद में खारवेल के आक्रमण से यह बात पूरी तरह सिद्ध हुई। साथ ही एक चक्रवर्ती शासक के लिये यह आवश्यक था कि वह सम्पूर्ण भारतीय उप-महाद्वीप को एक शासन के नीचे लाये। इसी कारण मौर्य साम्राज्य के लिए यह आवश्यक हो गया था कि वह कलिंग को अपने अधीन कर ले।
कलिंग युद्ध कहां हुआ था? | kalinga war in hindi
कलिंग पूर्व-मध्य भारत का एक ऐतिहासिक राज्य था। यह आज के समय के मध्य प्रदेश, अधिकांश ओडिशा, उत्तरी तेलंगाना और पूर्वोत्तर आंध्र प्रदेश तक फैला हुआ था। इस राज्य में काकीनाडा, विशाखापट्टनम, और श्रीकाकुलम (चिकाकोल) के बंदरगाहों के साथ-साथ राजमुंदरी और विजयनगर के महत्वपूर्ण शहर शामिल थे, जिससे कलिंग पूरे हिन्द महासागर में समुद्री व्यापार पर राज करता था।
कलिंग का समुद्री व्यापार पर एक छत्र राज एक मुख्य कारण था कलिंग के युद्ध होने का, और कलिंग के बारे में जानने के पश्चात कलिंग युद्ध कहां हुआ था, इसके बारे में जानते हैं – कलिंग का युद्ध इसी कलिंग राज्य के पास यानी वर्तमान में ओडिशा के पास स्थित धौली की पहाड़ियों पर लड़ा गया था।
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कलिंग युद्ध के दौरान प्रमुख घटनाएँ
| क्रमांक | घटना / तथ्य | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | युद्ध का समय | अशोक के राज्याभिषेक के 8वें वर्ष (261 ईसा पूर्व) में युद्ध शुरू हुआ और 9वें वर्ष में समाप्त हुआ |
| 2 | कलिंग के राजा | राजा अनंत पद्मनाभ, जिन्होंने मौर्य सेना के विरुद्ध वीरता से युद्ध किया |
| 3 | कलिंग की सेना | 60,000 पैदल सैनिक, 1,000 घुड़सवार, 700 हाथी |
| 4 | मौर्य सेना (मेगस्थनीज के अनुसार) | लगभग 1 लाख सैनिक, 1,700 घोड़े, हजारों हाथी |
| 5 | 13वें शिलालेख में उल्लेख | 1 लाख लोग मारे गए, 1.5 लाख लोग निर्वासित हुए, अनेकों घायल या प्रभावित |
| 6 | युद्ध का परिणाम | मौर्य साम्राज्य की विजय, लेकिन अत्यधिक रक्तपात और विनाश |
| 7 | अशोक पर प्रभाव | युद्ध की विभीषिका से आहत होकर, अशोक ने युद्ध की नीति त्याग दी |
| 8 | धर्म की ओर झुकाव | अशोक ने धम्म (बौद्ध धर्म) अपनाया, अहिंसा, करुणा और धर्म प्रचार को जीवन का उद्देश्य बनाया |
| 9 | शिलालेखों का संदेश | कलिंग विजय ने अशोक को गहरा दुःख दिया, जिससे उनके शासन की दिशा बदल गई |
कलिंग युद्ध का परिणाम | कलिंग युद्ध का अशोक पर क्या प्रभाव पड़ा
सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध में विजय प्राप्त की, युद्ध विजय के पश्चात सम्राट अशोक ने अभिलेख का निर्माण करवाया, जो कलिंग युद्ध का परिणाम को विस्तृत रूप से बताते हैं। कलिंग युद्ध में भयंकर रक्तपात हुआ, जिससे अशोक बेहद व्यथित हो उठे। इसके बाद उन्होंने युद्धनीति छोड़ दी और शांति व अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। अशोक के तेरहवें बृहद् अभिलेख से कलिंग युद्ध का परिणाम विस्तृत सूचना के रूप में प्राप्त होता है। इस अभिलेख से यह स्पष्ट होता है कि यह युद्ध बड़ा भयंकर था जिसमें भीषण रक्तपात तथा नरसंहार की घटनायें हुई –
युद्ध के तात्कालिक परिणाम
कलिंग युद्ध के तात्कालिक परिणाम के बारे अभिलेख से जो सूचना प्राप्त होती है वह इस प्रकार है –
- इस युद्ध में एक लाख 50 हजार व्यक्ति बन्दी बनाकर निर्वासित कर दिये गये, एक लाख लोगों की हत्या की गयी तथा इससे भी कई गुना अधिक मारे गये।
- युद्ध में भाग न लेने वाले ब्राह्मणों, श्रमणों तथा गृहस्थियों को अपने सम्बन्धियों के मारे जाने से महान कष्ट हुआ।
- सम्राट ने इस भारी नर संहार को स्वयं अपनी आँखों से देखा था और उनका हृदय परिवर्तन हो गया।
- युद्ध के बाद एक स्वतंत्र राज्य की स्वाधीनता का अंत हुआ।
- कलिंग मगध साम्राज्य का एक प्रान्त बना लिया गया तथा राजकुल का कोई राजकुमार वहाँ का उपराजा (वायसराय) नियुक्त कर दिया गया।
- कलिंग में दो अधीनस्थ प्रशासनिक केन्द्र स्थापित किये गये –
- उत्तरी केन्द्र ( राजधानी – तोसलि ) तथा दक्षिणी केन्द्र ( राजधानी – जौगढ़)।
- मौर्य साम्राज्य की पूर्वी सीमा बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत हो गयी।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
कलिंग युद्ध के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव बहुत अधिक है, पर इनमें से कुछ निम्न है –
- सम्राट अशोक ने साम्राज्य विस्तार वादी नीति का हमेशा के लिए त्याग कर दिया।
- सम्राट अशोक ने युद्ध और क्रूरता त्याग कर अहिंसा, प्रेम, दान, परोपकार और सत्य का रास्ता अपना लिया।
- उन्होंने अपने साम्राज्य में अहिंसा के सिद्धांतों को लागू किया और बौद्ध धर्म का प्रसार किया।
- उन्होंने हिंसक खेल गतिविधि और शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया।
- उन्होंने पड़ोसियों के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने की कोशिश की और युद्ध को टाल दिया।
- बुद्ध से प्रेरित होकर उन्होंने धम्म के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया जिसने साम्राज्य की नैतिकता को बढ़ावा दिया।
कलिंग युद्ध के पश्चात् के बदलाव
अशोक का हृदय और धर्म परिवर्तन
युद्ध समाप्त होने के बाद, सम्राट अशोक का हृदय इतने बड़े नरसंहार को देखकर परिवर्तित हो गया। उन्होंने कलिंग में जले हुए घर और बिखरी हुई लाशें देखीं तो उन्होंने फिर कभी हथियार नहीं उठाने का फैसला किया। कलिंग के युद्ध के बाद सम्राट अशोक एक शांतिपूर्ण सम्राट में बदल गए और उन्होंने अहिंसा के रास्ते पर चलने के लिए बौद्ध धर्म अपना लिया। और बौद्ध धर्म की नीतियों का विभिन्न अभिलेखों के माध्यम से प्रसार किया। उन्होंने सभी लोगों को अहिंसा के पथ पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने शासन के दौरान मौर्य साम्राज्य और अन्य राज्यों में और लगभग 250 ईसा पूर्व से दुनिया भर में बौद्ध धर्म के विस्तार को बढ़ावा दिया।
कलिंग युद्ध के बाद की नीतियां और सुधार
- पडोसी राज्यों में बौद्ध धर्म का प्रचार कर, बिना युद्ध के उन्हें साथ मिला लिया।
- साथ ही ‘धम्म’ की स्थापना की, जिसने विदेशों में बौद्ध धर्म का प्रचार किया।
- कलिंग की विजय के बाद, अशोक ने साम्राज्य के सैन्य विस्तार को समाप्त कर दिया और 40 से अधिक वर्षों के सापेक्ष शांति, सद्भाव और समृद्धि के युग की शुरुआत की।
- कलिंग युद्ध के पश्चात सम्राट अशोक ने घोषणा की कि जीवन में सच्ची विजय धर्म द्वारा विजय है , हिंसा के माध्यम से विजय नहीं।
- उन्होंने मगध की राज्य नीतियों में महत्वपूर्ण संशोधन किये। इससे भारत में मगध साम्राज्यवाद का अंत हो गया।
- कलिंग युद्ध के बाद सुदूर दक्षिण को छोड़कर अशोक ने सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया।
- उनके धम्म नियमों को चट्टानों और पत्थर के खंभों पर उकेरा गया था। साथ ही भारत के बाहर विदेश में बौद्ध धर्म और धम्म का प्रचार करने के लिए मिशनरियों को विभिन्न देशों में भेजा गया ताकि अधिक से अधिक लोग अहिंसक जीवन शैली को अपना सकें। विदेशों में फैला हुआ बौद्ध धर्म इसी युद्ध का परिणाम है।
निष्कर्ष
कलिंग युद्ध ने भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप, सम्राट अशोक ने हिंसा का मार्ग छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाया और अहिंसा और शांति के सिद्धांतों का प्रचार किया। अशोक के इस परिवर्तन ने न केवल उनके शासनकाल को प्रभावित किया, बल्कि भारतीय समाज और संस्कृति पर भी गहरा प्रभाव डाला। कलिंग युद्ध की घटनाएं हमें यह सिखाती हैं कि युद्ध और हिंसा के परिणाम कितने विनाशकारी हो सकते हैं और शांति और अहिंसा का मार्ग कितना महत्वपूर्ण है। यह युद्ध भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
कलिंग युद्ध के परिणामस्वरूप सम्राट अशोक ने किन प्रमुख बौद्ध स्थलों का निर्माण कराया?
सम्राट अशोक ने बौद्ध स्तूपों, जैसे सारनाथ, और बौद्ध विहारों का निर्माण कराया, जो बौद्ध धर्म के प्रमुख स्थलों में शामिल हैं।
कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने कौन-कौन से बौद्ध आचार्यों से संपर्क किया?
कलिंग युद्ध के बाद, अशोक ने बौद्ध आचार्यों से संपर्क किया जैसे महाकश्यप और अन्य प्रमुख बौद्ध विद्वान, जो धर्म की शिक्षाओं को फैलाने में मददगार साबित हुए।
कलिंग युद्ध के परिणामस्वरूप अशोक द्वारा जारी किए गए शिलालेख किस भाषा में थे?
अशोक द्वारा जारी किए गए शिलालेख मुख्यतः प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में थे।
कलिंग युद्ध के समय सम्राट अशोक के प्रमुख सलाहकार कौन थे?
कलिंग युद्ध के समय अशोक के प्रमुख सलाहकार चाणक्य (कौटिल्य) और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी थे, जिन्होंने रणनीति और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कलिंग युद्ध में कितने लोगों की जान गई थी?
कलिंग युद्ध में लगभग 1,00,000 लोगों की मृत्यु हुई थी, और करीब 1,50,000 लोग बंदी बनाए गए थे। इसके अलावा, हजारों लोग घायल हुए और असंख्य परिवार उजड़ गए। इस भारी रक्तपात से सम्राट अशोक अत्यंत व्यथित हो गए थे, जिससे उन्होंने आगे किसी भी युद्ध से दूर रहने और बौद्ध धर्म अपनाने का निर्णय लिया।
कलिंग पर उस समय किस शासक का शासन था?
कलिंग का राजा “रियुक” (Riyuk) था, जो कलिंग युद्ध के समय राज्य का शासक था।
मगध और कलिंग के बीच कितने वर्षों से संघर्ष जारी था?
सम्राट अशोक इस बात को लेकर चिंतित थे कि चार साल तक मगध और कलिंग के बीच संघर्ष जारी रहा, लेकिन फिर भी कलिंग को पराजित नहीं किया जा सका था। इस युद्ध में दोनों पक्षों के लाखों सैनिकों की मौत हुई और अनेक घायल हो गए। कलिंग के महाराज युद्ध में मारे गए थे, लेकिन कलिंग ने आत्मसमर्पण नहीं किया था।
कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने कौन सा धर्म स्वीकार कर लिया था?
कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया था।
कलिंग का युद्ध कब और किसके बीच हुआ?
कलिंग का युद्ध 261 ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक और कलिंग राज्य के बीच हुआ था।
यह युद्ध मौर्य साम्राज्य के विस्तार की नीति और कलिंग के रणनीतिक महत्व के कारण लड़ा गया था। युद्ध में भारी रक्तपात हुआ, जिसके बाद अशोक ने युद्ध नीति त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लिया।