पोषण अभियान (Poshan Abhiyan) | राष्ट्रीय पोषण मिशन 2018

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Summary

  • पोषण अभियान भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य देश में कुपोषण को खत्म करना और सभी नागरिकों, खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ आहार उपलब्ध कराना है।
  • इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी।
  • इस अभियान के तहत, सरकार विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों के माध्यम से लोगों को पोषण के महत्व के बारे में जागरूक कर रही है और उन्हें स्वस्थ आहार लेने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

पोषण अभियान की शुरुआत क्यों हुई? आज की दुनिया में जहां जीवनशैली में प्रसंस्कृत खाना (Processed Food) और गतिहीन आदतें बढ़ती जा रही है। ऐसे में पोषण एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बनकर उभरा है। खराब पोषण से कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग, माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की कमी आदि शामिल हैं, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में।

पोषण अभियान, जिसे राष्ट्रीय पोषण मिशन भी कहा जाता है, भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण स्थिति को बेहतर बनाना है। यह अभियान 8 मार्च 2018 को आरंभ किया गया था। स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने, पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को अपने आहार के बारे में उचित विकल्प चुनने के लिए पोषण अभियान आईसीडीएस की आवश्यकता है। यहां हम पोषण अभियान क्या है, इसकी पूरी जानकारी देंगे।

पोषण अभियान क्या है? (पोषण अभियान आईसीडीएस)

poshan Abhiyan
Poshan Abhiyan – पोषण अभियान क्या है?

पोषण अभियान आईसीडीएस, जिसे राष्ट्रीय पोषण मिशन के रूप में भी जाना जाता है। कुपोषण की समस्या से जूझ रहे लोगों तक पहुंचाने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक अहम पहल है। इस बहु-मंत्रालयी अभिसरण मिशन का उद्देश्य 2022 तक कुपोषण मुक्त भारत बनाने के अंतिम लक्ष्य के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर भारत में कुपोषण को कम करना है।

राष्ट्रीय पोषण अभियान आईसीडीएस की शुरुआत कब हुई?

  • राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत कब हुई: पोषण अभियान की शुरुआत 8 मार्च 2018 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर की गई थी।
  • राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्देश्य: कुपोषण को समाप्त करना, विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण स्तर को सुधारना।
  • पोषण अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। हालांकि, इस समस्या को कम करने के लिए हर साल सुपोषण दिवस मनाया जाता रहा है।

पोषण अभियान किस-किस के लिये है?

  • गर्भवती महिलाएं
  • धात्री महिलाएं तथा नवजात शिशु
  • किशोरियां
  • बच्चे
पोषण अभियान के घटकतथ्य
उद्देश्य | Objectiveबच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण और एनीमिया को कम करना।
लक्ष्य समूह | Target groupsबच्चे (0-6 वर्ष), किशोर (11-19 वर्ष), गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं।
प्रमुख संकेतक | Key Indicatorsस्टंटिंग, कम वजन, वेस्टिंग, एनीमिया, कम जन्म वजन और स्तनपान प्रथाएं।
रणनीतियां | Strategy-आंगनवाड़ी सेवाएं
-पूरक पोषण
-स्वास्थ्य और पोषण शिक्षा
-प्रारंभिक बाल विकास
-व्यवहार परिवर्तन संचार
-अभिसरण
-निगरानी और मूल्यांकन
प्रमुख कार्यक्रम | Flagship Programsपोषण पखवाड़ा, एनीमिया मुक्त भारत और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना।
अभिसरण | Convergenceस्वास्थ्य, शिक्षा, जल और स्वच्छता, और ग्रामीण विकास जैसे अन्य सरकारी विभागों और कार्यक्रमों के साथ सहयोग।
प्रौद्योगिकी | Technologyडेटा संग्रह, निगरानी और सूचना प्रसार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग।
निगरानी और मूल्यांकन | Monitor and Evaluationविभिन्न संकेतकों के माध्यम से कार्यक्रम के कार्यान्वयन और प्रभाव की नियमित निगरानी।
पोषण अभियान से जुडी ज़रूरी बातें

पोषण अभियान आईसीडीएस की विशेषताएं

  • पोषण अभियान एक समग्र योजना है, जो विभिन्न मंत्रालयों में पोषण से संबंधित हस्तक्षेपों की निगरानी, पर्यवेक्षण, लक्ष्यों का निर्धारण और मार्गदर्शन करने का कार्य करती है। यह अभियान भारत में कुपोषण को समाप्त करने में सहायक विभिन्न योजनाओं की निगरानी करता है। पोषण अभियान मातृ पोषण, शिशुओं और छोटे बच्चों के आहार संबंधी मानकों और उपचार प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगा।
  • इस अभियान के दो प्रमुख तत्व: जन आंदोलन और बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेप हैं। यह सामुदायिक स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (AWWs) को प्रोत्साहित करता है। पोषण ट्रैकर ऐप विशेष रूप से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए लाभार्थी डेटा को फॉर्म में दर्ज करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
  • यह अभियान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उनके निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा, यह विभिन्न सामाजिक गतिविधियों और ऑडिट के माध्यम से जन पोषण जागरूकता को बढ़ाने के लिए पोषण संसाधन केंद्र (NRC) की स्थापना कर रहा है।

पोषण अभियान आईसीडीएस के उद्देश्य क्या है?

पोषण अभियान जैसे अभियानों का प्राथमिक उद्देश्य कुपोषण के बारे में लोगों को बताना और लोगों के पोषण में सुधार करना है।

मुख्य उद्देश्य:
कुपोषण, बौनेपन और एनीमिया (विशेष रूप से छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोरियों में) की दर को घटाना।
कम वजन वाले नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों को प्रभावित करने वाली पोषण संबंधी समस्याओं को कम करना।
देशभर में समग्र पोषण स्तर को सुधारना और कुपोषण को समाप्त करने की दिशा में कार्य करना।

पोषण अभियान आईसीडीएस के प्रमुख उद्देश्य:

  • स्टंटिंग (बौनापन): 0-6 वर्ष के बच्चों में ठिगनेपन से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।
  • वेस्टिंग (कम वजन): 0 से 6 वर्ष के बच्चों का अल्प पोषण से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।
  • एनीमिया: 6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत, प्रति वर्ष 3% की दर से कमी लाना।
    • 15 से 49 वर्ष की किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत, प्रति वर्ष 3% की दर से कमी लाना।
  • लो बर्थ वेट: कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में कुल 6 प्रतिशत, प्रति वर्ष 2% की दर से कमी लाना।

1. बच्चों में कुपोषण कम करना

पोषण अभियान का एक मुख्य उद्देश्य बच्चों, विशेषकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण को कम करना है। यह अभियान जीवन के पहले छह महीनों के दौरान विशेष स्तनपान को बढ़ावा देने, पूरक आहार प्रथाओं में सुधार करने, सूक्ष्म पोषक तत्वों की खुराक तक पहुंच बढ़ाने और बच्चों में कुपोषण से संबंधित जटिलताओं को रोकने और उनका इलाज करने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने पर केंद्रित है।

2. गर्भवती महिलाओं और माताओं का पोषण सुधारना

यह अभियान गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण स्थिति में सुधार करने के लिए है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान पर्याप्त पोषण मातृ स्वास्थ्य, भ्रूण की वृद्धि और विकास व प्रसवोत्तर देखभाल के लिए आवश्यक है। पोषण अभियान का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और माताओं को प्रसवपूर्व देखभाल, मातृ पोषण की खुराक, आयरन और फोलिक एसिड की खुराक प्रदान करना है।

3. किशोरियों में पोषण स्तर बढ़ाना

पोषण अभियान किशोर लड़कियों को भी लक्षित करते हैं, उनकी अद्वितीय पोषण संबंधी आवश्यकताओं और कमजोरियों को पहचानते हैं। तेजी से विकास, बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं और पौष्टिक खाद्य पदार्थों तक सीमित पहुंच के कारण किशोरियों को अक्सर पोषण संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अभियान का उद्देश्य स्वस्थ आहार आदतों को बढ़ावा देना, माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की कमी को दूर करना और पोषण के बारे में सूचित विकल्प चुनने के लिए सशक्त बनाना है, जिससे किशोर लड़कियों की पोषण स्थिति में सुधार करना है।

अभियान के लाभ:

देश में कुपोषण, बौनेपन और एनीमिया की दर में कमी लाना।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कम वजन वाले जन्मों की संख्या को घटाना।
गर्भवती महिलाओं और माताओं को प्रसवपूर्व देखभाल, पोषण संबंधी आवश्यक सप्लीमेंट जैसे आयरन और फोलिक एसिड की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

पोषण अभियान की प्रमुख गतिविधियाँ

पोषण अभियान जिसे पोषण अभियान 2.0 के नाम से भी जाना जाता है, की प्रमुख गतिविधियाँ इस प्रकार है:

1. सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित वास्तविक समय की निगरानी

इस उद्देश्य से भारत सरकार ने पोषण ट्रैकर मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किया है। पोषण ट्रैकर एप आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से की जा रही सेवा वितरण गतिविधियों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों, किशोरों के लिए सम्पूर्ण लाभार्थी प्रबंधन की जानकारी प्रदान करता है।

वर्तमान में 97135 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण ट्रैकर एप का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा स्मार्ट फोन के माध्यम से पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन का उपयोग करके आंगनवाड़ी केन्द्रों में प्रदान की जाने वाली सेवाओं की दैनिक जानकारी की शत-प्रतिशत प्रविष्टि सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र पर ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस (जीएमडी) उपलब्ध कराई गई है – 2 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों की ऊंचाई मापने के लिए स्टेडियोमीटर, 6 माह से 2 वर्ष तक के बच्चों की लंबाई मापने के लिए इन्फैंटोमीटर, नवजात शिशुओं और माताओं के लिए वजन मापने की मशीन, ताकि बच्चों और माताओं के कुपोषण और स्वास्थ्य की उचित निगरानी की जा सके।

2. समुदाय आधारित गतिविधियाँ (सीबीई)

आंगनवाड़ी केन्द्रों की सेवाओं की गुणवत्ता, पहुँच और विस्तार को बढ़ाने के उद्देश्य से जन-भागीदारी बढ़ाने के लिए भारत सरकार के पोषण 2.0 के अंतर्गत नवीन दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को सुपोषण दिवस, दूसरे मंगलवार को गोदभराई, तीसरे मंगलवार को अन्नप्राशन, चौथे मंगलवार को बाल चौपाल तथा प्रत्येक तीन माह के पाँचवें मंगलवार को लालिमा दिवस का आयोजन आंगनवाड़ी केन्द्रों पर किया जाता है।

इन आयोजनों में उपस्थित पात्र लाभार्थियों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर जानकारी एवं परामर्श दिया जाता है। मंगल दिवस के आयोजन के लिए प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र को 500/- रूपये प्रतिमाह की धनराशि प्रदान की जाती है।

3. जन आंदोलन

पोषण विषय पर जन जागरूकता पैदा करने तथा इसे जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से पोषण माह (सितंबर माह) तथा पोषण पखवाड़ा (मार्च माह) का आयोजन प्रतिवर्ष एक बार किया जाता है। दोनों ही आयोजन समुदाय के सदस्यों, लाभार्थियों, पंचायत सदस्यों, जनप्रतिनिधियों तथा अन्य विभागों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाते हैं, ताकि पोषण स्वास्थ्य पर जागरूकता तथा प्रचार-प्रसार किया जा सके।

4. प्रोत्साहन एवं पुरस्कार

आंगनबाड़ी केन्द्रों पर निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा सहायिकाओं को प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है। जिसके तहत पात्र आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा सहायिकाओं को पोषण 2.0 के कार्य तथा दैनिक प्रविष्टि के लिए प्रतिमाह धनराशि प्रदान की जाती है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को निर्धारित शर्तों (प्रति माह कम से कम 80 प्रतिशत बच्चों का वजन तथा 60 प्रतिशत गृह भ्रमण) के अनुरूप कार्य करने पर 500/- रुपए प्रतिमाह तथा सहायिका को माह में 21 दिन केन्द्र खोलने पर 250/- रुपए प्रतिमाह दिए जाने का प्रावधान है।

पोषण महा अभियान का महत्व 

पोषण अभियान आईसीडीएस कुपोषण की समस्या का समाधान करने और लोगों के बीच स्वस्थ आहार आदतों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पोषण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखना है। भोजन करते समय तनाव कम करके, भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाने और जल्दी-जल्दी खाने से बचकर, पाचन तंत्र खाद्य पदार्थों को अधिक प्रभावी ढंग से पचा सकता है।

भारत में कुपोषण की समस्या

भारत में कुपोषण एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, जो देश भर में लाखों लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को प्रभावित कर रही है। अल्पपोषण, जिसमें उम्र के हिसाब से कम ऊंचाई और उम्र के हिसाब से कम वजन शामिल है, जो पांच साल से कम उम्र के बच्चों में प्रचलित है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तब होती है जब आहार में विटामिन ए, आयरन, आयोडीन, जिंक और कैल्शियम जैसे आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स की कमी होती है।

अतिपोषण, जो अधिक वजन और मोटापे की विशेषता है। भारत में विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में बढ़ती समस्या के रूप में उभर रही है। यह आहार पैटर्न में बदलाव, गतिहीन जीवन शैली, शुगर, फैट और नमक की खपत से प्रेरित है। ऐसे में इस समस्या को कम करने के लिए सुपोषण दिवस जैसे कार्यक्रम में बढ़ोतरी होनी चाहिए।

कुपोषण से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां

कुपोषण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। बचपन में कुपोषण के कारण शारीरिक विकास में रुकावट आ सकती है, जिससे कद छोटे हो जाते हैं। अल्पपोषण प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है, जिससे व्यक्ति संक्रमण, बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप थकान, कमजोरी और शारीरिक सहनशक्ति में कमी भी हो सकती है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, जैसे कि आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है। अतिपोषण और खराब आहार संबंधी आदतें भारत में मोटापा, मधुमेह, हृदय रोगों और अन्य समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है।

पोषण अभियान आईसीडीएस: राष्ट्रीय पोषण मिशन के 5 स्तंभ

1. पोषण अभियान आईसीडीएस-कॉमन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (सीएएस)

  • साफ्टवेयर से पोषाहार की स्थिति की निगरानी की जाएगी।
  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को स्मार्ट मोबाइल फोन उपलब्ध कराया जाएगा।
  • आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षकों को शिशु, मां और बच्चे के विकास को मापने के लिए विकास निगरानी उपकरण जैसे स्टैडोमीटर, इन्फेंटोमीटर और वजन मापने के उपकरण प्रदान किए जाएंगे।

2. कन्वर्जेंस एक्शन प्लानिंग

  • इसका उद्देश्य लक्षित जनसंख्या पर MWCD पोषण संबंधी सभी योजनाओं का अभिसरण सुनिश्चित करना है।
  • यह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के अभिसरण को सुनिश्चित करता है।
  • विशिष्ट लक्ष्यों के लिए बहुमंत्रालयी अभिसरण निर्धारित करना।

3. इंक्रीमेंटल लर्निंग अप्रोच (ILA) के माध्यम से पोषण अभियान ICDS अधिकारियों/कार्यकर्ताओं की क्षमता निर्माण

  • मौजूदा पर्यवेक्षक बैठकों में भाग लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता क्षमता निर्माण और सीखने के कार्यक्रमों में भाग ले रही हैं।
  • वृद्धिशील शिक्षण दृष्टिकोण में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षकों के लिए 21 विषयगत मॉड्यूल शामिल हैं।

4. जन आंदोलन (व्यवहार परिवर्तन संचार और सामुदायिक संघटन)

  • अभियान को वांछित सार्वजनिक भागीदारी के साथ एक जन आंदोलन के रूप में प्रबंधित किया जाएगा।
  • जागरूकता बढ़ाने और मुद्दों को संबोधित करने के लिए महीने में एक बार समुदाय आधारित कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

5. प्रदर्शन प्रोत्साहन

  • बेहतर सेवा वितरण के साथ-साथ क्षमता निर्माण की योजना बनाई जानी चाहिए।
  • अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को उनके प्रयासों के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

सरकारी प्रयास और सहयोग

सरकारी योजनाएँ और सहयोग पोषण अभियान जैसी पहल को आगे बढ़ाने और कुपोषण को व्यापक रूप से संबोधित करने में उनकी सफलता सुनिश्चित करने में सहायक हैं।

1. केंद्र और राज्य सरकारों का योगदान

केंद्र सरकार की योजनाएँ:

  • एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS): ICDS एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य छह वर्ष से कम आयु के बच्चों और उनकी माताओं को पूरक पोषण, स्वास्थ्य जाँच, टीकाकरण और प्री-स्कूल शिक्षा सहित सेवाओं का एक पैकेज प्रदान करना है।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): PMMVY एक मातृत्व लाभ कार्यक्रम है जिसके तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले जीवित बच्चे के जन्म पर नकद प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। इस योजना का उद्देश्य गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं और उनके बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति में सुधार करना है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): NHM में पोषण, टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य और परिवार नियोजन से संबंधित हस्तक्षेपों सहित मातृ और बाल स्वास्थ्य पर केंद्रित विभिन्न कार्यक्रम और पहल शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA): NFSA का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को सब्सिडी वाले खाद्यान्न तक पहुँच सुनिश्चित करके खाद्य और पोषण सुरक्षा प्रदान करना है।
  • पोषण माह: सितंबर में मनाया जाने वाला पोषण माह एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जिसका उद्देश्य पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और समुदायों के बीच पोषण प्रथाओं से संबंधित व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना है।

राज्य सरकार की योजनाएं:

  • आयुष मंत्रालय ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के हस्तक्षेपों के तहत करीब 4.37 लाख आँगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका की स्थापना की है।
  • साथ ही सरकार अब तक 6 राज्यों के कुछ ज़िलों में 1.10 लाख औषधीय पौधे का रोपण किए जा चुके हैं।
  • बच्चों और महिलाओं में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए सरकार ने पोषण 2.0 मिशन के अंतर्गत पूरक पोषण कार्यक्रम और पोषण अभियान कार्यक्रमों को समायोजित किया है।

2. गैर सरकारी संगठनों (NGOs) का सहयोग

NGOs सरकारी प्रयासों को पूरा करने और दूरदराज के समुदायों तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एनजीओ पोषण कार्यक्रमों को लागू करने, समुदाय-आधारित हस्तक्षेप करने, पोषण शिक्षा, परामर्श और व्यवहार परिवर्तन संचार जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ साझेदारी करते हैं। एनजीओ पोषण के क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान में योगदान करते हैं।

3. सार्वजनिक जागरूकता और जनसहभागिता

पोषण अभियानों की सफलता के लिए सार्वजनिक जागरूकता और भागीदारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे समुदाय में जुड़ाव और जवाबदेही को बढ़ावा देते हैं। सरकारें और गैर सरकारी संगठन संतुलित पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने, स्वस्थ आहार प्रथाओं को बढ़ावा देने और समुदायों के बीच सकारात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान चलाते हैं। ये अभियान प्रमुख संदेशों को प्रसारित करने और सार्वजनिक समर्थन जुटाने के लिए रेडियो, टेलीविजन, प्रिंट, सोशल मीडिया और सामुदायिक आउटरीच गतिविधियों सहित विभिन्न मीडिया चैनलों का उपयोग करते हैं।

Poshan Abhiyan की सफलता की कहानियाँ

पोषण अभियान की शुरुआत से ही कुपोषण से निपटने में सफलता की कहानियाँ न केवल आशा जगाती है बल्कि प्रभावी रणनीतियों और हस्तक्षेपों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं जिन्हें दोहराया जा सकता है और महत्वपूर्ण प्रभाव प्राप्त करने के लिए बढ़ाया जा सकता है।

सफलतापूर्वक कुपोषण कम करने के उदाहरण

महाराष्ट्र सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए एक पहल लागू किया, जिसमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, स्तनपान प्रथाओं को बढ़ावा देने, पौष्टिक भोजन तक पहुंच बढ़ाने और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

मध्य प्रदेश ने कुपोषित बच्चों और माताओं को विशेष देखभाल और उपचार प्रदान करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की। ये केंद्र चिकित्सीय भोजन, चिकित्सा देखभाल और परामर्श सेवाएं प्रदान करते हैं, जिससे हजारों कुपोषित लोगों की रिकवरी किया जा सका।

समुदायों में सकारात्मक बदलाव की कहानियाँ

ग्रामीण राजस्थान में, महिला स्वयं सहायता समूहों ने अपने समुदायों में कुपोषण को दूर करने के लिए सामूहिक कार्रवाई की। आय-सृजन गतिविधियों, पोषण शिक्षा सत्रों और रसोई बागान एसएचजी ने महिलाओं को अपने परिवार के स्वास्थ्य और पोषण के बारे में उचित निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाया, जिससे आहार की आदतों और पोषण की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आए।

केरल में, पारंपरिक खाने के नियमों को फिर से जीवित करने और पोषक तत्वों से भरपूर स्वदेशी फसलों को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए। भूले हुए अनाज, दालों और सब्जियों को स्थानीय आहार में फिर से शामिल करके और जैविक खेती प्रथाओं को प्रोत्साहित किया।

स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित पोषण का महत्व

जीवन भर सर्वोत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली बनाए रखने के लिए संतुलित पोषण आवश्यक है। ऐसा आहार जो पर्याप्त ऊर्जा, मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा), विटामिन, खनिज और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है, जो शारीरिक विकास, सीखने की क्षमताओं को बढाने के लिए आवश्यक है। खासकर प्रारंभिक बचपन और किशोरावस्था के दौरान। विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर एक संतुलित आहार प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। संतुलित पोषण कुपोषण को रोकने में मदद करता है, जिससे विकास में रुकावट, मोटापा और हृदय रोग, मधुमेह, व उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

पोषण अभियान की चुनौतियाँ और समाधान 

पोषण अभियान की प्रमुख चुनौतियाँ

  • संसाधनों की कमी: पोषण संबंधी कार्यक्रमों के लिए स्थायी और पर्याप्त वित्तीय सहायता की कमी।
  • जागरूकता की कमी: गलत धारणाएं और पारंपरिक मान्यताएं पोषण के महत्व को समझने में बाधा बनती हैं।
  • लॉजिस्टिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर की समस्याएँ: दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में कठिनाई।वितरण चैनलों और स्वास्थ्य केंद्रों की कमी।
  • सांस्कृतिक और सामाजिक बाधाएँ: कुछ समुदायों में लड़कियों और महिलाओं के पोषण पर कम ध्यान दिया जाता है।
  • डेटा की अनुपलब्धता और गुणवत्ता: डेटा संग्रह और विश्लेषण की प्रक्रियाओं में कमी।

समाधान:

  • संसाधनों की बेहतर व्यवस्था: सरकार और निजी क्षेत्र से अधिक वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्राप्त करना। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और दानदाताओं से सहायता प्राप्त करना।
  • व्यापक जागरूकता अभियान: स्कूलों, समुदायों और मीडिया के माध्यम से पोषण के महत्व के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाना।
  • लॉजिस्टिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास: ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या बढ़ाना।
  • डेटा संग्रह और विश्लेषण में सुधार: पोषण संबंधी डेटा संग्रहण की प्रक्रियाओं को मजबूत करना और नवीनतम तकनीकों का उपयोग करना।

पोषण अभियान आईसीडीएस: भविष्य की योजनाएँ

आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका

आंगनवाड़ी केंद्र समुदायों, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक बचपन देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए कार्य करते हैं।

भविष्य में लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीतियाँ

  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए नियमित अभियान चलना।
  • गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को आवश्यक पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराना।
  • आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित पोषण परीक्षण और पूरक आहार कार्यक्रम आयोजित करना।
  • नियमित अंतराल पर पोषण संबंधी डेटा का संग्रहण और विश्लेषण करें।

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PM POSHAN योजना और पोषण अभियान का संबंध (PM-POSHAN & Poshan Abhiyaan Connection)

1. योजना का उद्देश्य:
PM POSHAN योजना, जिसे पहले मिड-डे मील योजना के नाम से जाना जाता था, बच्चों में कुपोषण को कम करने, उनकी शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देने, और विद्यालयों में उपस्थिति बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जाती है।

2. पोषण अभियान के तहत एकीकृत प्रयास:
पोषण अभियान के तहत PM POSHAN को एक सप्लीमेंटरी पोषण इंटरवेंशन के रूप में शामिल किया गया है, ताकि स्कूल जाने वाले बच्चों को भी पौष्टिक भोजन के माध्यम से कुपोषण से बचाया जा सके।

हरियाणा का 2025-26 बजट और पहलें:

हरियाणा सरकार ने PM POSHAN के लिए वर्ष 2025-26 में ₹665.65 करोड़ का बजट पारित किया है, जो इस योजना की महत्वाकांक्षा और विस्तार को दर्शाता है।

प्रमुख बिंदु:

  • न्यूट्रिशन-रिच मील:
    बच्चों को ऐसे भोजन दिए जाएंगे जो प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन आदि से भरपूर हों।
  • किचन गार्डन:
    हर स्कूल में छोटे बगीचे तैयार किए जा रहे हैं, जहां बच्चों और स्कूल स्टाफ की भागीदारी से हरी सब्जियां उगाई जाएंगी। इससे न केवल भोजन की पौष्टिकता बढ़ेगी, बल्कि बच्चों को कृषि और पोषण का व्यावहारिक ज्ञान भी मिलेगा।
  • पिन्नी वितरण:
    “पिन्नी” एक पारंपरिक पौष्टिक मिठाई है, जिसे हरियाणा सरकार स्कूलों में बच्चों को दे रही है। इसमें घी, आटा, ड्रायफ्रूट्स जैसे तत्व होते हैं जो ऊर्जा और पोषण प्रदान करते हैं।
  • फ्लेवर्ड दूध:
    बच्चों को दूध पीने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से फ्लेवर्ड मिल्क (जैसे कि चॉकलेट या इलायची स्वाद) उपलब्ध कराया जा रहा है, जो कैल्शियम और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है।

दैनिक जीवन में उपयोगी सुझाव (Practical Tips)

  • परिवार या माता-पिता के लिए छोटे-छोटे अभ्यास जो आहार को बेहतर बनाएँ: स्थानीय, सस्ते और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उदाहरण।
  • पौष्टिक आहार तैयार करने की आसान विधियाँ / घर में पोषण बगीचा (kitchen garden) कैसे शुरू करें।
  • माइक्रो न्यूट्रीएंट्स (जैसे आयरन, विटामिन A, D, B12, जिंक) की कमी न हो इसके लिए घरेलू उपाय।

मापन एवं मूल्यांकन में पारदर्शिता (Accountability & Impact Assessment)

  • किस तरह से सरकार और अन्य एजेंसियाँ परिणामों की निगरानी कर रही हैं — कौन से इंडिकेटर उपयोग हो रहे हैं, रिपोर्टिंग कितनी नियमित है।
  • तीसरी-पक्ष की समीक्षा, स्वतंत्र शोधों की भूमिका, डेटा विश्वसनीयता।

निष्कर्ष

पोषण अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है जो सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य स्तर पर लोगों के पोषण को सुधारने का उद्देश्य रखता है। यह अभियान विभिन्न स्तरों पर सरकारी योजनाएँ और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा आयोजित किया जाता है। इस अभियान में शामिल होकर कई लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत कब हुई?

पोषण अभियान की शुरुआत 8 मार्च, 2018 को हुई थी।

पोषण अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?

पोषण अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण और एनीमिया को कम करना है।

प्रधानमंत्री पोषण अभियान क्या है?

प्रधानमंत्री पोषण योजना भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य देश के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। यह योजना देश के बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने और उन्हें स्वस्थ जीवन जीने के लिए सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई थी।

पोषण के लक्ष्य क्या है?

पोषण का लक्ष्य केवल भूख मिटाना ही नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक अवधारणा है जिसका उद्देश्य व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को सुनिश्चित करना है।

पोषण दिवस कब मनाया जाता है?

भारत में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है, ना कि पोषण दिवस। यह सप्ताह हर साल सितंबर के पहले सप्ताह में मनाया जाता है।

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