भारतीय लोकतंत्र के तीन स्तंभों में न्यायालय एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इनमें सर्वोच्च न्यायालय का स्थान सबसे ऊपर है। सर्वोच्च न्यायालय को उच्चतम न्यायालय या फिर अंग्रेजी में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है। सर्वोच्च न्यायालय देश में लोकतंत्र को बहाल रखने और सरकार की भूमिका को सही रखने में भी एक अमूल्य योगदान देता है।
आज के ब्लॉग में हम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश list के साथ वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ के बारे में जानेंगे और देखेंगे कि सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कि कैसे नियुक्ति होती है तथा भारत में मुख्य न्यायधीश का क्या महत्व है।
वर्तमान में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कुल 32 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जिनमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। जबकि संविधान द्वारा निर्धारित अधिकतम सीमा 34 न्यायाधीशों की है। भारतीय संविधान के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष निर्धारित की गई है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश | Chief Justice of India
भारत गणराज्य में अब तक कुल 51 न्यायाधीशों ने मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा दी है (जिसमें वर्तमान मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं)। भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच. जे. कनिया थे, जबकि वर्तमान में न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई इस पद पर कार्यरत हैं।
मुख्य न्यायाधीश का परिचय
- उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भारतीय न्यायपालिका के प्रमुख होते हैं। इनके ऊपर न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अखंडता को बनाए रखने तथा महत्वपूर्ण मामलों में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर भारतीय लोकतंत्र से होने वाले खिलवाड़ को भी रोकने की अहम जिम्मेदारी होती है।
- उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद देश के सबसे प्रतिष्ठित और जिम्मेदारी से भरे पदों में से एक है।
- वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट इंडिया में मुख्य न्यायाधीश के अलावा 31 अन्य न्यायाधीश कार्यरत हैं और मुख्य न्यायधीश के रूप में श्री धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ कार्य कर रहे हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख के रूप में, भारत के मुख्य न्यायाधीश मामलों के आवंटन और संवैधानिक पीठों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार होते हैं। साथ ही मुख्य न्यायाधीश, न्यायालय की सभी न्यायिक और प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन के जिम्मेदार भी होते हैं।
- इनके ऊपर न्यायिक कार्य, प्रशासनिक कार्य, नेतृत्व और मार्गदर्शन, संवैधानिक कर्तव्य और सार्वजनिक प्रतिनिधित्व समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी होती हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति कैसे होती है? | Appointment of Chief Justice
- सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में मुख्य न्यायाधीश का चयन आमतौर पर वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर किया जाता है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत, राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय में पहले मुख्य न्यायाधीश के साथ 31 न्यायधीशों की नियुक्ति की जाती थी, लेकिन अब इस संख्या को बढ़ाकर 34 कर दिया गया है।
- सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसमें मुख्य न्यायाधीश समेत सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
- मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए कोलेजियम की सिफारिश के बाद, केंद्रीय कानून मंत्रालय राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजता है और राष्ट्रपति उस सिफारिश को मंजूरी देते हैं। इसके बाद उस शख्स को भारत का मुख्य न्यायाधीश घोषित किया जाता है।
- राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद शपथ समारोह का आयोजन होता है, जिसमें भारत के राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाई जाती है।
- सुप्रीम कोर्ट के ऑफ इंडिया के मुख्य न्यायाधीश बनने के आमतौर पर वही योग्यताएं चाहिए होती हैं, जो सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में न्यायाधीश बनने के लिए चाहिए होती हैं। गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को कॉलेजियम की सिफारिश के बाद भारत का मुख्य न्यायाधीश घोषित किया जाता है।
भारत के मुख्य न्यायाधीशों की सूची | Chief Justices of India List in Hindi
28 जनवरी 1950 को भारत के उच्चतम न्यायालय के रूप स्थापित इस न्यायालय में अब तक 50 मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किये जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट जज लिस्ट(cji list in hindi) आप आगे देख सकते हैं और उनके कार्यकाल के भी बारे में जानकारी हासिल कर सकत्व हैं।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश List 2025 और उनका कार्यकाल | सुप्रीम कोर्ट जज लिस्ट 2025
| क्रम | मुख्य न्यायाधीश | कार्यकाल शुरू | कार्यकाल ख़तम |
| 1 | एचजे कनिया | 26 जनवरी 1950 | 6 नवंबर 1951 |
| 2 | एम. पतंजलि शास्त्री | 7 नवंबर 1951 | 3 जनवरी 1954 |
| 3 | मेहर चंद महाजन | 4 जनवरी 1954 | 22 दिसंबर 1954 |
| 4 | बिजन कुमार मुखर्जी | 23 दिसंबर 1954 | 31 जनवरी 1956 |
| 5 | सुधी रंजन दास | 1 फरवरी 1956 | 30 सितंबर 1959 |
| 6 | भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा | 1 अक्टूबर 1959 | 31 जनवरी 1964 |
| 7 | पीबी गजेन्द्रगडकर | 1 फरवरी 1964 | 15 मार्च 1966 |
| 8 | अमल कुमार सरकार | 16 मार्च 1966 | 29 जून 1966 |
| 9 | कोका सुब्बा राव | 30 जून 1966 | 11 अप्रैल 1967 |
| 10 | कैलाश नाथ वांचू | 12 अप्रैल 1967 | 24 फ़रवरी 1968 |
| 11 | मोहम्मद हिदायतुल्लाह | 25 फ़रवरी 1968 | 16 दिसंबर 1970 |
| 12 | जयंतीलाल छोटेलाल शाह | 17 दिसंबर 1970 | 21 जनवरी 1971 |
| 13 | सर्व मित्र सीकरी | 22 जनवरी 1971 | 25 अप्रैल 1973 |
| 14 | ए.एन. रे | 26 अप्रैल 1973 | 28 जनवरी 1977 |
| 15 | मिर्ज़ा हमीदुल्लाह बेग | 29 जनवरी 1977 | 21 फ़रवरी 1978 |
| 16 | वाई.वी. चंद्रचूड़ | 22 फ़रवरी 1978 | 11 जुलाई 1985 |
| 17 | पीएन भगवती | 12 जुलाई 1985 | 20 दिसंबर 1986 |
| 18 | रघुनंदन स्वरूप पाठक | 21 दिसंबर 1986 | 18 जून 1989 |
| 19 | एंग्लागुप्पे सीतारामैया वेंकटरामैया | 19 जून 1989 | 17 दिसंबर 1989 |
| 20 | सब्यसाची मुखर्जी | 18 दिसंबर 1989 | 25 सितंबर 1990 |
| 21 | रंगनाथ मिश्रा | 26 सितंबर 1990 | 24 नवंबर 1991 |
| 22 | कमल नारायण सिंह | 25 नवंबर 1991 | 12 दिसंबर 1991 |
| 23 | मधुकर हीरालाल कनिया | 13 दिसंबर 1991 | 17 नवंबर 1992 |
| 24 | ललित मोहन शर्मा | 18 नवंबर 1992 | 11 फरवरी 1993 |
| 25 | एमएन वेंकटचलैया | 12 फ़रवरी 1993 | 24 अक्टूबर 1994 |
| 26 | अज़ीज़ मुशब्बर अहमदी | 25 अक्टूबर 1994 | 24 मार्च 1997 |
| 27 | जे.एस. वर्मा | 25 मार्च 1997 | 17 जनवरी 1998 |
| 28 | मदन मोहन पुंछी | 18 जनवरी 1998 | 9 अक्टूबर 1998 |
| 29 | आदर्श सेन आनंद | 10 अक्टूबर 1998 | 31 अक्टूबर 2001 |
| 30 | सैम पिरोज भरुचा | 1 नवंबर 2001 | 5 मई 2002 |
| 31 | भूपिंदर नाथ किरपाल | 6 मई 2002 | 7 नवंबर 2002 |
| 32 | गोपाल बल्लव पटनायक | 8 नवंबर 2002 | 18 दिसंबर 2002 |
| 33 | वी.एन. खरे | 19 दिसंबर 2002 | 1 मई 2004 |
| 34 | एस. राजेंद्र बाबू | 2 मई 2004 | 31 मई 2004 |
| 35 | रमेश चंद्र लाहोटी | 1 जून 2004 | 31 अक्टूबर 2005 |
| 36 | योगेश कुमार सभरवाल | 1 नवंबर 2005 | 13 जनवरी 2007 |
| 37 | के.जी. बालकृष्णन | 14 जनवरी 2007 | 11 मई 2010 |
| 38 | एस.एच. कपाड़िया | 12 मई 2010 | 28 सितंबर 2012 |
| 39 | अल्तमस कबीर | 29 सितंबर 2012 | 18 जुलाई 2013 |
| 40 | पी. सदाशिवम | 19 जुलाई 2013 | 26 अप्रैल 2014 |
| 41 | राजेंद्र मल लोढ़ा | 27 अप्रैल 2014 | 27 सितंबर 2014 |
| 42 | एच.एल. दत्तू | 28 सितंबर 2014 | 2 दिसंबर 2015 |
| 43 | टीएस ठाकुर | 3 दिसंबर 2015 | 3 जनवरी 2017 |
| 44 | जगदीश सिंह खेहर | 4 जनवरी 2017 | 27 अगस्त 2017 |
| 45 | दीपक मिश्रा | 28 अगस्त 2017 | 2 अक्टूबर 2018 |
| 46 | रंजन गोगोई | 3 अक्टूबर 2018 | 17 नवंबर 2019 |
| 47 | शरद अरविंद बोबडे | 18 नवंबर 2019 | 23 अप्रैल 2021 |
| 48 | एनवी रमण | 24 अप्रैल 2021 | 26 अगस्त 2022 |
| 49 | यूयू ललित | 27 अगस्त 2022 | 8 नवंबर 2022 |
| 50 | डी.वाई. चंद्रचूड़ | 9 नवंबर 2022 | 10 नवंबर 2024 |
| 51 | संजीव खन्ना | 11 नवंबर 2024 | 13 मई 2025 |
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश list 2025 | सुप्रीम कोर्ट जज लिस्ट 2025
| क्र.सं. | नाम | लिंग | नियुक्ति की तिथि | मुख्य न्यायाधीश बनने की तिथि | सेवानिवृत्ति तिथि | अदालत |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | शरद अरविंद बोबडे | पुरुष | 12 अप्रैल 2013 | 18 नवम्बर 2019 | 23 अप्रैल 2021 | बॉम्बे |
| 2 | एन. वी. रमण | पुरुष | 17 फरवरी 2014 | 24 अप्रैल 2021 | 26 अगस्त 2022 | आंध्र प्रदेश |
| 3 | रोहिंटन फली नरीमन | पुरुष | 7 जुलाई 2014 | — | 12 अगस्त 2021 | भारतीय विधिज्ञ परिषद |
| 4 | उदय उमेश ललित | पुरुष | 13 अगस्त 2014 | 27 अगस्त 2022 | 8 नवम्बर 2022 | भारतीय विधिज्ञ परिषद |
| 5 | अजय माणिकराव खानविलकर | पुरुष | 13 मई 2016 | — | 29 जुलाई 2022 | बॉम्बे |
| 6 | धनञ्जय यशवंत चंद्रचूड़ | पुरुष | 13 मई 2016 | 9 नवम्बर 2022 | 10 नवम्बर 2024 | बॉम्बे |
| 7 | अशोक भूषण | पुरुष | 13 मई 2016 | — | 4 जुलाई 2021 | इलाहाबाद |
| 8 | एल. नागेश्वर राव | पुरुष | 13 मई 2016 | — | 7 जून 2022 | भारतीय विधिज्ञ परिषद |
| 9 | संजय किशन कौल | पुरुष | 17 फरवरी 2017 | — | 25 दिसम्बर 2023 | दिल्ली |
| 10 | मोहन शांतनगौड़र | पुरुष | 17 फरवरी 2017 | — | 4 मई 2023 | कर्नाटक |
| 11 | एस. अब्दुल नज़ीर | पुरुष | 17 फरवरी 2017 | — | 4 जनवरी 2023 | कर्नाटक |
| 12 | नवीन सिन्हा | पुरुष | 17 फरवरी 2017 | — | 18 अगस्त 2021 | पटना |
| 13 | इंदु मल्होत्रा | महिला | 27 अप्रैल 2018 | — | 13 मार्च 2021 | भारतीय विधिज्ञ परिषद |
| 14 | इंदिरा बनर्जी | महिला | 7 अगस्त 2018 | — | 23 सितम्बर 2022 | कोलकाता |
| 15 | विनीत शरण | पुरुष | 7 अगस्त 2018 | — | 10 मई 2022 | इलाहाबाद |
| 16 | के. एम. जोसेफ | पुरुष | 7 अगस्त 2018 | — | 16 जून 2023 | केरल |
| 17 | हेमंत गुप्ता | पुरुष | 2 नवम्बर 2018 | — | 16 अक्टूबर 2022 | पंजाब एवं हरियाणा |
| 18 | आर. सुबाष रेड्डी | पुरुष | 2 नवम्बर 2018 | — | 4 जनवरी 2022 | तेलंगाना |
| 19 | मुकेश शाह | पुरुष | 2 नवम्बर 2018 | — | 15 मई 2023 | गुजरात |
| 20 | अजय रस्तोगी | पुरुष | 2 नवम्बर 2018 | — | 17 जून 2023 | राजस्थान |
| 21 | दिनेश महेश्वरी | पुरुष | 18 जनवरी 2019 | — | 14 मई 2023 | राजस्थान |
| 22 | संजीव खन्ना | पुरुष | 18 जनवरी 2019 | 11 नवम्बर 2024 | 13 मई 2025 | दिल्ली |
| 23 | भूषण रामकृष्ण गवई | पुरुष | 24 मई 2019 | 14 मई 2025 | 23 नवम्बर 2025 | बॉम्बे |
| 24 | सूर्यकांत | पुरुष | 24 मई 2019 | 24 नवम्बर 2025 | 9 फरवरी 2027 | पंजाब एवं हरियाणा |
| 25 | अनिरुद्ध बोस | पुरुष | 24 मई 2019 | — | 10 अप्रैल 2024 | कोलकाता |
| 26 | ए. एस. बोपन्ना | पुरुष | 24 मई 2019 | — | 19 मई 2024 | कर्नाटक |
| 27 | कृष्ण मुरारी | पुरुष | 23 सितम्बर 2019 | — | 8 जुलाई 2023 | इलाहाबाद |
| 28 | एस. रविन्द्र भट्ट | पुरुष | 23 सितम्बर 2019 | — | 20 अक्टूबर 2023 | दिल्ली |
| 29 | वी. रामसुब्रमण्यन | पुरुष | 23 सितम्बर 2019 | — | 29 जून 2023 | मद्रास |
| 30 | हृषिकेश रॉय | पुरुष | 23 सितम्बर 2019 | — | 31 जनवरी 2025 | गुवाहाटी |
भारत का प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन था? | Who was the first Chief Justice of India?
भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश(mukhya nyayadhish) हरिलाल जेकिसुंदस कानिया थे, जिन्होंने 26 जनवरी, 1950 से 6 नवंबर, 1951 को अपनी मृत्यु तक सेवा की। भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के बाद उन्हें उद्घाटन CJI के रूप में नियुक्त किया गया था, जिसने भारत के संघीय न्यायालय की जगह ली थी। न्यायमूर्ति कानिया ने स्वतंत्रता के बाद के युग में भारतीय न्यायपालिका की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
न्यायमूर्ति कानिया का कार्यकाल न्यायिक स्वतंत्रता स्थापित करने और भारत के नए अपनाए गए संविधान की व्याख्या करने की शुरुआती चुनौतियों से चिह्नित था। उनके नेतृत्व ने सर्वोच्च न्यायालय के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण मिसाल कायम की।
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति संजीव खन्ना | CJI Sanjiv Khanna
संजीव खन्ना ने वर्ष 1977 में मॉडर्न स्कूल (नई दिल्ली) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। वर्ष 1980 में सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से स्नातक करने के बाद, उन्होंने न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के कैंपस लॉ सेंटर में कानून की पढ़ाई की। उनके पिता न्यायमूर्ति देव राज खन्ना 1985 में दिल्ली उच्च न्यायालय से न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुए और उनकी माँ सरोज खन्ना दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज में हिंदी व्याख्याता के रूप में कार्यरत थीं। खन्ना के चाचा हंस राज खन्ना भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश थे।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना का परिचय
संजीव खन्ना भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 51वें मुख्य न्यायाधीश हैं। उन्हें 18 जनवरी, 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था और वर्तमान में वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के मुख्य संरक्षक और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल (NJA) के अध्यक्ष हैं।
वे 17 जून, 2023 से 25 दिसंबर, 2023 तक सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति (SCLSC) के अध्यक्ष और 26 दिसंबर, 2023 से 10 नवंबर, 2024 तक NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे हैं।
योगदान और उपलब्धियाँ
- प्रैक्टिस के दौरान, संजीव खन्ना ने संवैधानिक कानून, प्रत्यक्ष कराधान, मध्यस्थता, वाणिज्यिक कानून, कंपनी कानून, भूमि कानून, पर्यावरण संरक्षण कानून और चिकित्सा लापरवाही से संबंधित विविध विषयों और मामलों को निपटाया।
- वे सात साल तक आयकर विभाग के वरिष्ठ स्थायी वकील रहे और बाद में, दिल्ली उच्च न्यायालय में पदोन्नत होने तक कुछ महीनों के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के वरिष्ठ स्थायी वकील (सिविल) रहे।
- एमिकस क्यूरी के रूप में, उन्होंने कई आपराधिक मामलों और सार्वजनिक महत्व के मुद्दों से जुड़े मामलों में दिल्ली उच्च न्यायालय की सहायता की।
भारत के मुख्य न्यायाधीश की चुनौतियाँ | Challenges Faced by the Chief Justice of India
भारत के मुख्य न्यायाधीश को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और अखंडता सुनिश्चित करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कुछ प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं:
- समय पर न्याय सुनिश्चित करना।
- न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करना।
- कानून के शासन को बनाए रखना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना।
- न्यायपालिका की निष्पक्षता और अखंडता को बनाए रखना।
- न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मुद्दों को संबोधित करना।
मुख्य न्यायाधीश के अधिकार और कर्तव्य | Powers and Duties of the Chief Justice
भारत के मुख्य न्यायाधीश को न्यायिक प्रशासन ने नेतृत्व, पीठ के गठन, प्रशासनिक कार्य तथा महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई समेत कई अहम अधिकार प्राप्त हैं। इसके अलावा न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित करने, न्यायाधीशों को मार्गदर्शन और आवश्यक निर्देश देने तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता जैसे अहम कर्तव्य इनके कंधे पर होते हैं।
Vartman Mein Bharat ke Mukhya Nyayadhish kaun Hai
भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई (B. R. Gavai) हैं। उन्होंने 14 मई 2025 को 52वें CJI के रूप में शपथ ग्रहण की और उनका कार्यकाल 23 नवंबर 2025 तक रहेगा।
न्यायिक प्रशासन
- सर्वोच्च न्यायालय के मुखिया के रूप में मुख्य न्यायधीश के ऊपर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक प्रशासन की भी जिम्मेदारी होती है।
- CJI के ऊपर मामलों के आवंटन और संवैधानिक पीठों की नियुक्ति से जुड़ी जिम्मेदार होती है। मुख्य न्यायाधीश अन्य न्यायाधीशों को सभी कार्य भी आवंटित करते हैं।
- मुख्य न्यायाधीश के ऊपर रोस्टर के रखरखाव, सर्वोच्च अदालत के अधिकारियों की नियुक्ति और सर्वोच्च न्यायालय के पर्यवेक्षण और कामकाज से संबंधित सामान्य और विविध मामलों को देखने की भी जिम्मेदारी होती है।
मुख्य न्यायाधीश का महत्व
- भारतीय लोकतंत्र चेक एंड बैलेंस के सिद्धांत पर काम करता है और ऐसे में इसे चलाने में कार्यपालिका, विधयिका और न्यायपालिका, तीनों का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए भारतीय लोकतंत्र को सही तरीके से चलाने में मुख्य न्यायाधीश का काफी महत्व होता है।
- मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व करते हैं और प्रमुख मामलों की सुनवाई करते हैं। वे संवैधानिक बेंच का नेतृत्व करते हैं जो महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों पर निर्णय देती है। साथ ही ये न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों के बीच समन्वय का भी कार्य करते हैं। इससे हमें इस पद की अहमियत पता चलती है।
- साथ ही मुख्य न्यायाधीश की सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मुख्य न्यायाधीश न्यायिक सुधारों और नीतियों को लागू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इससे पता चलता है कि सिर्फ न्यायिक निर्णयों ही नहीं, बल्कि न्यायिक प्रणाली की प्रभावशीलता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने में भी मुख्य न्यायाधीश का काफी महत्व है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल
भारत के सभी मुख्य न्यायाधीशों का औसत कार्यकाल लगभग 1.5 वर्ष (यानी 18.1 महीने) रहा है। 22वें मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति के.एन. सिंह, ने केवल 17 दिनों तक यह पद संभाला, जो अब तक का सबसे कम कार्यकाल रहा है। इसके विपरीत, न्यायमूर्ति वाई.वी. चंद्रचूड़ ने 7.3 वर्षों (लगभग 88.63 महीने) तक सेवा देकर सबसे लंबा कार्यकाल निभाया है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे का कार्यकाल औसत से थोड़ा कम, यानी 1.4 वर्ष (17.17 महीने) रहा, जबकि उनके उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति एन.वी. रमना का कार्यकाल और भी कम, 1.3 वर्ष (16 महीने) रहा।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का वेतन
वेतन, भत्ता और पेंशन
| पद | वेतन | उपदान (ग्रेच्युटी) |
|---|---|---|
| भारत के मुख्य न्यायाधीश | 2,80,000/- रुपए प्रति माह | 20,00,000/- रुपए |
| उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश | 2,50,000/- रुपए प्रति माह | 20,00,000/- रुपए |
| उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश | 2,50,000/- रुपए प्रति माह | 20,00,000/- रुपए |
| उच्च न्यायालय के न्यायाधीश | 2,25,000/- रुपए प्रति माह | 20,00,000/- रुपए |
भारत के मुख्य न्यायाधीश और न्यायिक सक्रियता
भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक सक्रियता को दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। न्यायिक सक्रियता उस न्यायिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें न्यायाधीश कानून की व्याख्या और अनुप्रयोग इस उद्देश्य से करते हैं कि नागरिकों के मौलिक अधिकार सुरक्षित रहें और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिले। मुख्य न्यायाधीश के पास यह शक्ति होती है कि वे न्यायिक सक्रियता के माध्यम से नागरिक अधिकारों की रक्षा करें और सरकार को उसके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराएँ। भारत में न्यायिक सक्रियता के कई ऐतिहासिक उदाहरण मिलते हैं, जिनमें विशाखा मामला, केशवानंद भारती मामला, और सूचना का अधिकार मामला विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश | Bharat ke 52वें ka Mukhya Nyayadhish
नियुक्ति और कार्यकाल
न्यायमूर्ति संजय खन्ना का कार्यकाल 13 मई 2025 को समाप्त हुआ, जिनके स्थान पर न्यायमूर्ति भुषण रामकृष्ण गवई 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। उन्होंने 10 नवंबर 2024 को पद संभाला था और लगभग छह माह तक इस पद पर कार्य किया।
प्रमुख न्यायिक निर्णय
- नोटबंदी (2016) के पक्ष में दिए गए निर्णय में न्यायमूर्ति गवई पीठ के सदस्य रहे।
- उन्होंने संविधान पीठ में शामिल होकर अनुच्छेद 370 की समाप्ति को बरकरार रखने और चुनावी बॉन्ड योजना (Electoral Bond Scheme) को रद्द करने वाले फैसले का हिस्सा बने।
- पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह (2024) मामले में, उन्होंने एससी/एसटी वर्गों में “क्रीमी लेयर” लागू करने की वकालत की ताकि “वास्तविक समानता” सुनिश्चित हो सके।
मुख्य न्यायाधीश के संवैधानिक प्रावधान
- नियुक्ति: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 124(2) के अंतर्गत की जाती है। परंपरा के अनुसार सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को CJI नामित किया जाता है।
- भूमिका: CJI को “रोस्टर का मास्टर” कहा जाता है—वे मामले किस पीठ को सौंपे जाएँ और सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करें, इसमें उनका निर्णायक प्रभाव होता है।
- अन्य अधिकार: CJI राष्ट्रपति की सहमति से अदालत को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने, तदर्थ न्यायाधीश नियुक्ति एवं नियुक्तियों में मार्गदर्शन देने जैसे संवैधानिक अधिकार रखते हैं।
- निष्कासन: उन्हें हटाने की प्रक्रिया संविधान द्वारा परिभाषित है, जिसमें दोनों सदनों में विशेष बहुमत से लोकसभा में प्रस्ताव पारित करना शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट आर्डर लिस्ट | हालिया आदेश (Latest Orders) की सूची
– हालिया आदेश (Latest Orders) की सूची
नीचे Supreme Court की वेबसाइट पर अपलोड किए गए कुछ शीर्ष हालिया ऑर्डर्स (जिसकी तारीख 19–20 अगस्त 2025 है) दिए जा रहे हैं:
- MUSKAN vs. AASIYA BEGUM – T.P.(Crl.) No. 490/2025 – (Uploaded on 20-08-2025)
- KAVITHA THILAKAN vs. PRASHANT KUMAR – T.P.(C) No. 1885/2025 – (Uploaded on 20-08-2025)
- NEETU BISHT vs. MAYANK BISHT – T.P.(C) No. 1850/2025 – (Uploaded on 20-08-2025)
- REEBA ABRAHAM vs. SHAJI ABRAHAM VARGHESE – T.P.(C) No. 1844/2025 – (Uploaded on 20-08-2025)
- MRINALINI UPADHYAY vs. SHARON MUMUKSHU MUDGAL – T.P.(C) No. 1817/2025 – (Uploaded on 20-08-2025)
- SHAMA PARMEEN vs. MOHD. IRFAN SIDDIQUI – T.P.(C) No. 1816/2025 – (Uploaded on 20-08-2025)
- SNEHA KUMARI VISHKARMA vs. RAJEEV KUMAR – T.P.(C) No. 1814/2025 – (Uploaded on 20-08-2025)
- NIYATI YADAV vs. ANUJ YADAV – T.P.(C) No. 1809/2025 – (Uploaded on 20-08-2025)
- … (और अन्य शीर्ष ऑर्डर)
मुख्य न्यायाधीशों के कार्यकाल
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 (1950) के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष तय की गई है। इसी कारण किसी भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) का कार्यकाल उनकी पदोन्नति की तिथि से लेकर सेवानिवृत्ति की तिथि तक रहता है। इस प्रकार, प्रत्येक मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल उसकी आयु, वरिष्ठता और मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नति की तिथि पर निर्भर करता है।
1950 से अब तक भारत में कुल 47 मुख्य न्यायाधीश हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, सभी मुख्य न्यायाधीशों का औसत कार्यकाल लगभग 1.5 वर्ष (18.1 महीने) रहा है। इनमें से सबसे छोटा कार्यकाल न्यायमूर्ति के.एन. सिंह का रहा, जिन्होंने मात्र 17 दिनों तक यह पद संभाला। इसके विपरीत, न्यायमूर्ति वाई.वी. चंद्रचूड़ ने सबसे लंबा 7.3 वर्ष (88.63 महीने) तक सेवा दी। हाल के वर्षों में, न्यायमूर्ति एस.ए. बोबड़े का कार्यकाल औसत से थोड़ा कम 1.4 वर्ष (17.17 महीने) रहा, जबकि न्यायमूर्ति एन.वी. रमन्ना का कार्यकाल भी औसत से कम, लगभग 1.3 वर्ष (16 महीने) था।
अन्य देशों से तुलना
- अमेरिका (USA): वहाँ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल आजीवन होता है। यानी वे तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक वे स्वयं इस्तीफा न दें या उनके खिलाफ महाभियोग न चलाया जाए। अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति सीनेट की सलाह और सहमति से मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है। अब तक केवल एक बार (1805 में) महाभियोग की प्रक्रिया हुई थी, लेकिन वह भी असफल रही।
- यूनाइटेड किंगडम (UK): वहाँ मुख्य न्यायाधीश के समकक्ष पद को लॉर्ड चीफ जस्टिस कहा जाता है। उनकी नियुक्ति ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन के जरिए विशेष पैनल द्वारा की जाती है। यह नियुक्ति उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों में से होती है। लॉर्ड चीफ जस्टिस का कार्यकाल भी जीवनभर होता है, लेकिन उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु 75 वर्ष है, जो भारत से 10 वर्ष अधिक है।
भारतीय स्थिति
भारत में मुख्य न्यायाधीशों का कार्यकाल अन्य देशों की तुलना में काफी कम होता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में सबसे लंबे समय तक मुख्य न्यायाधीश रहने वाले जॉन मार्शल ने लगभग 34 वर्ष तक सेवा दी, जबकि भारत में सबसे लंबा कार्यकाल 7.3 वर्ष का ही रहा।
भारत के अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल का मानना है कि किसी भी मुख्य न्यायाधीश को कम से कम तीन वर्ष का कार्यकाल मिलना चाहिए, ताकि वे न्यायिक व्यवस्था और संस्थागत सुधारों में ठोस बदलाव ला सकें। इसके लिए कॉलेजियम को नियुक्तियों के समय विशेष ध्यान देना चाहिए।
यह भी पढ़ें:
निष्कर्ष
आज के इस सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश list के ब्लॉग से हमें पता चलता है कि भारतीय न्यायव्यवस्था में मुख्य न्यायाधीश का क्या महत्व है तथा संविधान और लोकतंत्र को जीवंत रखने में वो कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम ये भी कह सकते हैं कि भारतीय न्यायपालिका के मुखिया के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन करके लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं और ये आमलोगों के लिए न्याय की आखिरी उम्मीद भी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्याया
धीश की अनुपस्थिति की स्थिति में कौन कार्यभार संभालता है?
मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति या छुट्टी के दौरान, सुप्रीम कोर्ट का वरिष्ठतम न्यायाधीश या एक विशेष न्यायाधीश उनकी जिम्मेदारियाँ संभालता है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में किस प्रकार की विशेष समितियाँ कार्य करती हैं?
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में विभिन्न विशेष समितियाँ कार्य करती हैं, जैसे कि न्यायिक सुधार समिति और कानूनी शिक्षा समिति। ये समितियाँ न्यायिक प्रणाली के सुधार, केस प्रबंधन, और कानूनी शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर विचार करती हैं और सिफारिशें प्रस्तुत करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए क्या कोई विशेष नैतिक कोड होता है जिसे उन्हें पालन करना होता है?
हाँ, मुख्य न्यायाधीश को एक उच्च नैतिक मानक का पालन करना होता है, जिसमें न्याय की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, और पारदर्शिता शामिल है, जो उनकी न्यायिक भूमिका का मूल आधार हैं।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के फैसलों को कानूनी भाषाओं के अलावा अन्य भाषाओं में कैसे अनुवादित किया जाता है?
मुख्य न्यायाधीश के फैसलों का अनुवाद विभिन्न भाषाओं में कानूनी अनुवादकों द्वारा किया जाता है, ताकि फैसले का व्यापक प्रसार और समझ सुनिश्चित की जा सके।
क्या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए कोई विशिष्ट पोशाक या ड्रेस कोड होता है?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए न्यायिक पोशाक का एक विशिष्ट कोड होता है, जिसमें गहरे रंग की जॉज और गाउन शामिल होते हैं, जो अदालत की औपचारिकता और गरिमा को बनाए रखते हैं।
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के 52वें मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 52वें मुख्य न्यायाधीश हैं। 14 मई, 2025 को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ली। न्यायमूर्ति गवई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति बीआर गवई सीजेआई संजीव खन्ना के सेवानिवृत्त होने के बाद सीजेआई बने।
सुप्रीम कोर्ट में कुल कितने जज हैं?
देश के उच्चतम न्यायालय में मुख्य न्यायधीश को मिलाकर कुल 33 न्यायाधीश होते हैं।
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
पतंजलि शास्त्री, श्री मेहर चंद महाजन, श्री बिजन कुमार मुखर्जी और श्री एस. आर. दास, इलाहाबाद, बॉम्बे, मद्रास, उड़ीसा, असम, नागपुर, पंजाब, सौराष्ट्र, पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्य संघ, मैसूर, हैदराबाद, मध्य भारत और त्रावणकोर-कोचीन के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायधीशों ने भाग लिया।
सुप्रीम कोर्ट में कितने न्यायाधीश हैं?
सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम 34 न्यायाधीश (1 मुख्य न्यायाधीश + 33 अन्य न्यायाधीश) हैं।
भारत का उच्चतम न्यायालय कहां स्थित है?
भारत का उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली में स्थित है। यह भारत की राजधानी में टिलक मार्ग पर स्थित है।
वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई हैं। उन्होंने 14 मई 2025 को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया।
CJ की नियुक्ति कौन करता है?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं।
नियुक्ति की प्रक्रिया:
सीनियरिटी का सिद्धांत – परंपरा के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही मुख्य न्यायाधीश बनाया जाता है।
कंसल्टेशन (परामर्श) – राष्ट्रपति नियुक्ति से पहले सुप्रीम कोर्ट के अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों से परामर्श लेते हैं।
राष्ट्रपति का आदेश – परामर्श के बाद, राष्ट्रपति द्वारा आधिकारिक रूप से नियुक्ति की जाती है।
2025 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
2025 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) हैं न्यायमूर्ति भुषण रामकृष्ण गौई (Bhushan Ramkrishna Gavai)।